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केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दिल्ली में उच्च स्तरीय बैठक लेकर की समग्र कृषि क्षेत्र की समीक्षा|Union Minister Shri Shivraj Singh Chouhan reviewed the entire agriculture sector during a high-level meeting in Delhi.

 

अल नीनो से निपटने की रणनीति, हर हफ्ते होगी बैठक- केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान

जिन जिलों में अल नीनो का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकता है, वहां विशेष ध्यान देकर जिलाधिकारियों की बैठक की जाएगी- श्री शिवराज सिंह

जिलेवार कंटिंजेंसी प्लान और खाद उपलब्धता की केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह द्वारा बारीकी से समीक्षा

कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए मिशन मोड में मुहिम चलाने के श्री शिवराज सिंह चौहान ने दिए निर्देश

"दलहन आत्मनिर्भर भारत" के लक्ष्य की पूर्ति के लिए केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का विशेष जोर

प्रविष्टि तिथि: 16 JUN 2026 1:59PM by PIB Delhi

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली स्थित कृषि भवन, में उच्चस्तरीय साप्ताहिक कृषि समीक्षा बैठक में खरीफ 2026 के लिए देशभर की तैयारियों की गहन समीक्षा की। साथ ही, संभावित अल नीनो परिस्थितियों के बीच उन्होंने कपास का उत्पादन बढ़ाने, दलहन में आत्मनिर्भरता और कम बारिश वाले जिलों के लिए अग्रिम कंटिंजेंसी प्लान पर विशेष जोर देते हुए साफ संदेश दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में किसान हितों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

बैठक में अल नीनो की संभावित स्थिति पर चर्चा करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने साफ निर्देश दिया कि जिन जिलों में कम बारिश या वर्षा में असमानता की आशंका है, वहां पहले से पूरी तैयारी की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे जिलों की स्पष्ट पहचान कर राज्य सरकारों के साथ मिलकर फसलवार कंटिंजेंसी प्लान तैयार किए जाएं, ताकि किसी भी मौसमीय चुनौती की स्थिति में किसानों को तुरंत विकल्प, सलाह और सहायता उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि पानी के संरक्षण, नमी प्रबंधन, इंटरक्रॉपिंग और वैकल्पिक फसल पैटर्न पर विशेष ध्यान देते हुए, हर जोखिम वाले जिले के लिए अलग और व्यावहारिक रणनीति बनाई जाए।

श्री शिवराज सिंह चौहान ने यह भी निर्देश दिए कि जिन 9–10 राज्यों में अल नीनो का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक पड़ सकता है, वहां के चिन्हित जिलों के जिला अधिकारियों, कृषि विभाग, केवीके और अन्य विस्तार तंत्र के साथ समन्वित बैठकें आयोजित की जाएं। उन्होंने कहा कि इन बैठकों में जिला स्तर पर पूरी स्थिति स्पष्ट कर किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाया जाए, ताकि हर किसान को यह पता रहे कि उसके क्षेत्र के लिए कौन-सी सावधानियां और कौन-से फसल विकल्प अधिक सुरक्षित हैं। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि खतरे को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के बजाय, वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर शांत, भरोसेमंद और समाधान-उन्मुख संदेश किसानों तक पहुंचे, यही सरकार की प्राथमिकता है।

बैठक में खरीफ 2026 के लिए फसलवार लक्ष्य, बुवाई की प्रगति और राज्यवार तैयारियों की समीक्षा करते हुए कपास उत्पादन बढ़ाने पर विशेष चर्चा हुई। श्री शिवराज सिंह चौहान ने वैज्ञानिक तरीकों, सही किस्मों के चयन, अंतरफसली खेती, मल्चिंग और नमी संरक्षण जैसे उपायों को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने पर जोर दिया, ताकि कपास की उत्पादकता और आय दोनों में सुधार हो।

दलहन आत्मनिर्भरता मिशन पर भी विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि सरकार का प्रयास है कि अरहर, उड़द, मूंग जैसी दालों में देश अधिक से अधिक आत्मनिर्भर बने और आयात पर निर्भरता कम हो। इसके लिए राज्यों के साथ मिलकर फसल चक्र, क्षेत्र विस्तार, बेहतर बीज उपलब्धता और तकनीकी मार्गदर्शन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि किसान सुरक्षित आय के साथ दलहन उत्पादन बढ़ा सकें।

समीक्षा के दौरान उर्वरकों की उपलब्धता, बाजार में मंडी भाव, जलाशयों व जल भंडारण की स्थिति और राज्यवार स्टॉक की जानकारी भी प्रस्तुत की गई। कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर उर्वरक उपलब्धता है और जैसे-जैसे मानसून की रफ्तार बढ़ेगी, राज्यों और जिलों तक आपूर्ति को और चुस्त-दुरुस्त रखा जाएगा। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देने के साथ ही इस पर भी जोर दिया कि जहां कहीं भी सूक्ष्म स्तर पर कमी की आशंका दिखे, वहां अग्रिम रूप से आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि किसान को किसी तरह की दिक्कत न हो।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने कृषि विश्वविद्यालयों, आईसीएआर संस्थानों, केवीके और राज्यों के कृषि विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी ज्ञान तभी सार्थक है, जब वह समय पर खेत तक पहुंचे और किसान उसे आसानी से अपनाकर लाभ उठा सके। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सतत संवाद, नियमित समीक्षा और जमीन से जुड़े फीडबैक के आधार पर ही खरीफ 2026 को सफल और सुरक्षित बनाया जा सकता है।