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आत्मनिर्भर पंचायतें भारत की यात्रा को 'विकसित भारत' की ओर आगे बढ़ाएंगी: श्री विवेक भारद्वाज, सचिव, पंचायती राज मंत्रालय|Self-reliant Panchayats will propel India's journey towards 'Viksit Bharat': Shri Vivek Bharadwaj, Secretary, Ministry of Panchayati Raj.

 


गुजरात के गांधीनगर में आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पर आउटरीच कार्यशाला आयोजित

प्रविष्टि तिथि: 09 JUN 2026 6:59PM by PIB Delhi

भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय ने गुजरात सरकार के पंचायती राज विभाग के सहयोग से 9 जून 2026 को गांधीनगर में आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम पर एक आउटरीच कार्यशाला का आयोजन किया।

इस कार्यशाला में पूरे राज्य से वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधि और प्रतिभागी शामिल हुए। वर्कशॉप में 100 से ज़्यादा प्रतिभागी व्यक्तिगत रूप से शामिल हुए, जबकि 300 से ज़्यादा लोग वर्चुअल रूप से जुड़े। प्रतिभागियों में 78 पंचायत प्रतिनिधि शामिल थे, जिनमें अपनी-अपनी ग्राम पंचायतों में 'ओन सोर्स रेवेन्यू' (ओएसआर) जुटाने में बेहतरीन काम करने वाले प्रतिनिधि भी शामिल थे।

मुख्य भाषण देते हुए, पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने 'आत्मनिर्भर पंचायत' के विज़न और 'आत्मनिर्भर भारत' 'विकसित भारत' के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने ज़मीनी स्तर पर शासन की बदलाव लाने की क्षमता पर ज़ोर दिया और कहा कि आत्मनिर्भर और सशक्त पंचायतों के ज़रिए ही इस विज़न को साकार किया जा सकता है। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि पंचायतें राष्ट्रीय बदलाव की अहम कड़ी हैं, वे नागरिकों में जागरूकता बढ़ाने और आत्मनिर्भर समुदाय बनाने की दिशा में मिलकर समन्वित प्रयास करने की विशेषता रखती हैं।

उन्होंने पंचायतों के नेताओं से अपने इलाकों में सार्थक और स्थायी बदलाव लाने के लिए नए और रचनात्मक तरीके से सोचने और पक्के इरादे के साथ काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि असली नेतृत्व की पहचान उस विरासत से होती है, जो एक व्यक्ति अपने पीछे छोड़ जाता है। उन्होंने विकास और तरक्की के नए मौके खोलने के लिए सही नज़रिए को अपनाने पर ज़ोर दिया। साथ ही, उन्होंने प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि वे खुद को बदलाव लाने वाले कारक के तौर पर देखें और ऐसी सशक्त, मज़बूत और आत्मनिर्भर पंचायतें बनाने में योगदान दें, जो 2047 तक 'विकसित भारत' के विज़न को साकार करने में मदद करें।

गुजरात सरकार के पंचायत, ग्रामीण आवास और ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव, श्री धनंजय द्विवेदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की आत्मनिर्भरता की यात्रा आर्थिक रूप से मज़बूत ग्राम पंचायतों पर टिकी है। उन्होंने 'अपने स्रोतों से राजस्व' बढ़ाने, अनुदान पर निर्भरता कम करने और सरकारी फंड का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। गुजरात की प्रगति का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने और ज़्यादा नवाचार, रणनीतिक योजना और बेहतरीन तौर-तरीकों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने सरपंचों को अच्छा काम करने वाली पंचायतों से सीखने और सफल मॉडलों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि अच्छा शासन स्थानीय स्तर पर ज़िम्मेदारी लेने, जवाबदेही और समुदाय की सक्रिय भागीदारी से शुरू होता है।

अपने स्वागत भाषण में, गुजरात सरकार के अतिरिक्त विकास आयुक्त डॉ. गौरव दहिया ने 'अपने स्रोतों से राजस्व' को मज़बूत करने के महत्व पर प्रकाश डाला और पंचायत प्रतिनिधियों को प्रभावी स्थानीय शासन के लिए नए और टिकाऊ तरीके अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। गुजरात के नगर निगमों का उदाहरण देते हुए, जिन्होंने मज़बूत बजट और राजस्व प्रणालियाँ बनाई हैं, उन्होंने कहा कि पंचायतों को भी स्थानीय स्वशासन की आर्थिक रूप से मज़बूत संस्थाओं के रूप में विकसित होने की ज़रूरत है।

नाबार्ड, गुजरात के जनरल मैनेजर डॉ. प्रदीप पराटे ने कहा कि 'विकसित भारत' का विज़न, ग्रामीण समुदायों को राष्ट्रीय विकास क लिए ज़रूरी साझेदार मानता है। उन्होंने देश भर में पंचायती राज संस्थाओं और ग्रामीण स्थानीय निकायों को मज़बूत करने के लिए पंचायती राज मंत्रालय के निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने पंचायतों को आर्थिक विकास और आत्मनिर्भरता का मज़बूत ज़रिया बनाने के लिए मिलकर संस्थागत कदम उठाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने ग्राम पंचायतों को ऐसे व्यावहारिक और राजस्व अर्जित करने वाली परियोजनाओं को विकसित करने में नाबार्ड का सहयोग देने की बात भी कही, जिनसे स्थानीय आर्थिक विकास और वित्तीय स्थिरता को बढ़ावा मिल सके।

आउटरीच कार्यशाला को संबोधित करते हुए, हुडको, अहमदाबाद के क्षेत्रीय प्रमुख श्री विमल कुमार ने तकनीकी सहायता, क्षमता निर्माण और बुनियादी ढांचे के विकास के ज़रिए पंचायती राज संस्थाओं का समर्थन करने के हुडको के संकल्प को दोहराया।

इस दौरान पंचायती राज मंत्रालय की तकनीकी टीम ने 'आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम' का विस्तृत ढांचा पेश किया और 'आत्मनिर्भर पंचायत पोर्टल' का लाइव डेमो प्रस्तुत किया। इस सेशन में एप्लीकेशन वर्कफ़्लो और डैशबोर्ड के बारे में पूरी जानकारी दी गई, जिससे प्रतिभागियों को कार्यक्रम को डिजिटल रूप से प्रभावी ढंग से लागू करने और चलाने के लिए व्यावहारिक जानकारी मिली।

इस आउटरीच वर्कशॉप में बातचीत पर आधारित सवाल-जवाब का सत्र भी रखा गया था। पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज ने गुजरात पंचायती राज विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में प्रतिभागियों से बातचीत की। इस सत्र के ज़रिए सवालों के जवाब देने, प्रस्तावों पर चर्चा करने और रचनात्मक बातचीत व जानकारी के आदान-प्रदान के लिए एक मंच मिला।

इस मौके पर पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव श्रीमती मुक्ता शेखर और गुजरात सरकार के विकास आयुक्त श्री डी. एन. मोदी भी मौजूद थे।

यह कार्यशाला देश भर में आत्मनिर्भर, जीवंत और आर्थिक रूप से सशक्त पंचायतें बनाने की दिशा में बातचीत, जानकारी साझा करने और क्षमता निर्माण के लिए एक अहम मंच साबित हुई।

आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम

आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम का मकसद योग्य ग्राम पंचायतों और ब्लॉक पंचायतों की मदद करना है, ताकि वे आर्थिक रूप से व्यवहार्य और भरोसेमंद परियोजनाएं बना सकें और उन्हें लागू कर सकें। इससे उनकी अपना राजस्व और मजबूत होगा। एक पारदर्शी राष्ट्रीय चुनौती प्रक्रिया के ज़रिए, चुनी हुई पंचायतों के प्रस्तावों को प्रोजेक्ट बनाने से लेकर वित्तीय समापन तक खास तकनीकी मदद मिलेगी। इस मदद में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी), कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) फंडिंग, बैंक फाइनेंस और सरकारी योजनाओं के साथ तालमेल बिठाने जैसी सुविधाएं शामिल होंगी।

इसमें ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति के ज़रिए समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित की जाती है। प्रोजेक्ट के विचार खुद पंचायतों की तरफ से आते हैं और तकनीकी मदद से चुने हुए प्रस्तावों को बैंक-योग्य प्रोजेक्ट में बदला जाता है। चार साल के इस कार्यक्रम का लक्ष्य आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मज़बूत पंचायतों की एक नई पीढ़ी तैयार करना है, जो यह दिखा सके कि वित्तीय आज़ादी और अच्छा स्थानीय शासन साथ-साथ आगे बढ़ते हैं।