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प्रधानमंत्री ने संस्कृत सुभाषितम् के माध्यम से नवाचार और उद्यमशीलता में विविधता के महत्व को रेखांकित किया|The Prime Minister highlighted the importance of diversity in innovation and entrepreneurship through a Sanskrit *Subhashitam*.

 

प्रविष्टि तिथि: 15 JUN 2026 8:55AM by PIB Delhi

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी  ने कहा कि नवाचार और उद्यमशीलता के क्षेत्र में प्रत्येक व्यक्ति के सोचने का तरीका अलग होता है तथा एक अद्वितीय रचनात्मक दृष्टि होती है और यही विविधता नई संभावनाओं को जन्म देती है। उन्होंने उल्लेख किया कि जिस प्रकार जल के प्रत्येक स्रोत का स्वाद अलग होता है, उसी प्रकार प्रत्येक प्रतिभा की अपनी विशिष्ट पहचान और योगदान होता है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि विविध विचारों और क्षमताओं के मिलन से ही नवाचार और प्रगति संभव हो पाती है।

प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया है, जो इस प्रकार है:

“पिण्डे पिण्डे मतिर्भिन्ना कुण्डे कुण्डे नवं पयः।

जातौ जातौ नवाचाराः नवा वाणी मुखे मुखे॥”

यह सुभाषित यह संदेश देता है कि नवाचार और उद्यमशीलता के क्षेत्र में प्रत्येक व्यक्ति की सोचने की शैली अलग होती है तथा उसकी एक अद्वितीय रचनात्मक दृष्टि होती है और यही विविधता नई संभावनाओं को जन्म देती है। जिस प्रकार एक स्रोत से दूसरे स्रोत के जल का स्वाद भिन्न होता है, उसी प्रकार प्रत्येक प्रतिभा की अपनी विशिष्ट पहचान और योगदान होता है। इन भिन्न विचारों और क्षमताओं के मेल से ही नवाचार और प्रगति संभव हो पाती है।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;

“पिण्डे पिण्डे मतिर्भिन्ना कुण्डे कुण्डे नवं पयः।

जातौ जातौ नवाचाराः नवा वाणी मुखे मुखे॥”