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नएचआरसी, इंडिया का स्नातकोत्तर स्तर के छात्रों के लिए 4-सप्ताह का व्यक्तिगत ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम – 2026 आज नई दिल्ली में शुरू|NHRC, India's 4-week Individual Summer Internship Programme for Postgraduate Students – 2026 begins today in New Delhi

 


इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए, अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमण्यन ने मानवाधिकारों की स्थायी विरासत पर प्रकाश डाला, जबकि कृषि, औद्योगिक और डिजिटल क्रांतियों ने मानव जीवन बदल दिया है

सदस्य न्यायमूर्ति (डॉ.) विद्युत रंजन सारंगी ने कहा कि देश की एकता को सुदृढ़ बनाने में ज्ञान, युवा शक्ति का पूरक होता है।

सदस्य, श्रीमती विजया भारती सयानी ने मूल्य-आधारित शिक्षा और व्यक्तिगत विकास में इंटर्नशिप की भूमिका पर ज़ोर दिया।

महासचिव, श्री भरत लाल ने कहा कि इंटर्नशिप का उद्देश्य मानवाधिकारों, मानवीय मूल्यों और सामाजिक दायित्व के प्रति समर्पित नेतृत्व की नई पीढ़ी तैयार करना

21 राज्यों/केन्द्र शासित प्रदेशों के 40 संस्थानों और विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले 100 छात्रों को 1,668 से अधिक आवेदकों में से चुना गया

प्रविष्टि तिथि: 01 JUN 2026 6:11PM by PIB Delhi

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), इंडिया का चार-सप्ताह का प्रतिष्ठित 'ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप कार्यक्रम' (एसआईपी) 2026 आज नई दिल्ली स्थित उसके मुख्यालय में शुरू हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों के बीच मानवाधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस कार्यक्रम के लिए विभिन्न शैक्षणिक विषयों से प्राप्त 1,668 आवेदनों में से 21 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के 40 शैक्षणिक संस्थानों से 100 विद्यार्थियों का चयन किया गया है। इनमें कानून, समाज विज्ञान, सामाजिक कार्य, मनोविज्ञान, पत्रकारिता, जेंडर स्टडीज़, डिजिटल ह्यूमैनिटीज़ और अंतर्राष्ट्रीय संबंध जैसे विषयों के विद्यार्थी शामिल हैं।

कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए, भारत के न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने कहा कि यद्यपि कृषि, औद्योगिक और डिजिटल क्रांतियों ने मानव जीवन को परिवर्तित कर दिया है, फिर भी स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल्यों की स्थायी प्रकृति पूरे विश्व में अपरिवर्तित बनी हुई है। यह मानवाधिकारों और मानवीय मूल्यों के महत्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यद्यपि अनेक छात्र प्रारंभ में अपने शैक्षणिक प्रोफ़ाइल को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से इंटर्नशिप प्राप्त करना चाहते हैं, परंतु इसकी वास्तविक महत्ता ज्ञान अर्जित करने, अपने दृष्टिकोण का विस्तार करने तथा समाज की गहन समझ विकसित करने में निहित है।

न्यायमूर्ति वी. रामासुब्रमणियन ने कहा कि इंटर्नों का चयन ‘मिनी इंडिया’ का प्रतिनिधित्व करता है। इसका उद्देश्य विभिन्न पृष्ठभूमियों से आने वाले छात्रों को एक साथ लाना और उनमें मानवाधिकार चेतना के बीज बोना है, ताकि वे भविष्य में अपने चरित्र और आचरण के माध्यम से एक अधिक विकसित और संवेदनशील समाज के निर्माण में योगदान दे सकें। उन्होंने प्रशिक्षुकों को इस इंटर्नशिप का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया, जिसे विशेष रूप से उन्हें कक्षाओं और डिजिटल स्रोतों से परे सीखने के अवसर प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि इस इंटर्नशिप के बाद कुछ छात्र भी मानवाधिकारों के प्रति अधिक सहानुभूति, जागरूकता और प्रतिबद्धता के साथ उभरते हैं, तो यह कार्यक्रम अपने उद्देश्य को प्राप्त कर लेगा।

अपने संबोधन में, न्यायमूर्ति (डॉ.) बिद्युत रंजन सारंगी ने कहा कि यह इंटर्नशिप विभिन्न क्षेत्रों से आए छात्रों को एक मंच पर लाती है, जिससे उन्हें संस्कृतियों, भावनाओं और विचारों के आदान-प्रदान का अवसर मिलता है तथा वे स्वयं को नए दृष्टिकोण से पहचान सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश की एकता को मज़बूत करने में ज्ञान, युवा शक्ति का पूरक होता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों के साथ बातचीत से प्रशिक्षुकों को बहुमूल्य जानकारी और गहरी समझ की प्राप्ति होगी तथा उन्होंने उन्हें उन लोगों की आवाज़ बनने के लिए प्रोत्साहित किया जो मौन हैं।

एनएचआरसी की सदस्य श्रीमती विजया भारती सयानी ने कहा कि भारत में मानवाधिकार और मानवीय मूल्य अलग-अलग अवधारणाएँ नहीं हैं। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ तथा ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ जैसे प्राचीन भारतीय सिद्धांतों का उल्लेख करते हुए बताया कि आधुनिक कानूनी ढाँचे के विकसित होने से बहुत पहले ही भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों में मानवाधिकारों की भावना निहित रही है। उन्होंने कहा कि इस इंटर्नशिप को केवल एक शैक्षणिक अभ्यास के रूप में नहीं, बल्कि मूल्य-आधारित शिक्षा और व्यक्तिगत विकास के अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मानवाधिकार केवल कानूनी प्रावधानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे हमारे दैनिक व्यवहार और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता एवं सहानुभूति में भी प्रतिबिंबित होते हैं। उन्होंने कहा कि आज के तेजी से बदलते विश्व में तकनीकी उन्नति और आर्थिक प्रगति निस्संदेह आवश्यक हैं, किन्तु मूल्यों से रहित विकास कभी भी वास्तव में न्यायपूर्ण समाज का निर्माण नहीं कर सकता। उन्होंने प्रशिक्षुओं को यह भी प्रेरित किया कि वे इस कार्यक्रम को जिम्मेदार नागरिक के रूप में स्वयं को समृद्ध और विकसित करने के अवसर के रूप में अपनाएँ।

इससे पूर्व अपने संबोधन में, एनएचआरसी, इंडिया के महासचिव श्री भरत लाल ने इस बात पर बल दिया कि एनएचआरसी युवाओं के बौद्धिक और नैतिक विकास में महत्वपूर्ण निवेश कर रहा है। इसके लिए आयोग अपने व्यक्तिगत तथा ऑनलाइन इंटर्नशिप कार्यक्रमों का विस्तार कर रहा है, ताकि देश के दूर-दराज़ क्षेत्रों सहित सभी विद्यार्थियों तक इसकी पहुँच सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने बताया कि इस इंटर्नशिप का मुख्य उद्देश्य ऐसी नई पीढ़ी के नेतृत्व का निर्माण करना है, जो मानवाधिकारों, मानवीय मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति समर्पित हो। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं पर मानवाधिकारों, लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं, समानता, न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व जैसे आदर्शों की रक्षा और उन्हें आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, जिनके लिए हमारे पूर्वजों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। उन्होंने कहा कि जीवन केवल अपने बारे में सोचने तक सीमित नहीं है, बल्कि दूसरों, विशेषकर गरीबों और समाज के सबसे कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील होने का नाम है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को प्रेरित किया कि वे ज्ञान और समझ का प्रसार करके तथा मानवाधिकारों, मानवीय मूल्यों, सहानुभूति और करुणा को बढ़ावा देकर एवं उन्हें अपने जीवन में अपनाकर जीवन के उद्देश्य को सार्थक बनाएं।

 

इससे पूर्व, इंटर्नशिप कार्यक्रम का संक्षिप्‍त विवरण देते हुए एनएचआरसी, इंडिया के संयुक्त सचिव श्री समीर कुमार ने कहा कि प्रतिभागियों की व्यापक शैक्षणिक एवं संस्थागत विविधता ने इस कार्यक्रम के शिक्षण वातावरण को अत्यंत समृद्ध बनाया है और वह इसके अखिल भारतीय स्वरूप में प्रतिबिंबित होता है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि किस तरह इस कार्यक्रम के संवादात्मक सत्र, समूह अनुसंधान परियोजनाएँ, किताबों की समीक्षा, भाषण प्रतियोगिताएँ और पुलिस थानों, तिहाड़ जेल, एसएचईओडब्ल्यूएस के बुज़ुर्गों के आश्रय-गृह और अन्य राष्ट्रीय आयोगों के शैक्षणिक भ्रमण, प्रशिक्षुओं की मानवाधिकार से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समझ को गहरा करने के लिए तैयार किए गए हैं।