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सरकार ने बेईमान तत्वों द्वारा डीजल की कालाबाजारी और जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए नियंत्रण आदेश अधिसूचित किया है|The government has notified a control order to curb the black marketing and hoarding of diesel by unscrupulous elements.

 

प्रविष्टि तिथि: 12 JUN 2026 2:57PM by PIB Delhi

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बेईमान तत्वों द्वारा डीजल की कालाबाजारी और जमाखोरी पर अंकुश लगाने के लिए "मोटर स्पिरिट और हाई-स्पीड डीजल (खुदरा दुकानों के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026" को अधिसूचित किया है।

ये नियम अस्थायी उपाय हैं, जो शुरू में 90 दिनों तक वैध रहेंगे, और सभी खुदरा उपभोक्ताओं को डीजल की उपलब्धता सुनिश्चित करेंगे।

वर्तमान स्थिति में कुछ खुदरा दुकानों में मांग में असमान और अप्रत्याशित वृद्धि देखी जा रही है, क्योंकि थोक श्रेणी के उपभोक्ता अपनी खरीददारी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के रिटेल आउटलेट्स की ओर स्थानांतरित कर रहे है। यह वृद्धि औद्योगिक, प्रत्यक्ष, संस्थागत और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं द्वारा अपने निजी पंपों से खुदरा दुकानों पर डीजल खरीदने के कारण हो रही है, क्योंकि थोक और खुदरा डीजल की कीमतों में अंतर है। दूसरा कारण यह है कि निजी तेल विपणन कंपनियों द्वारा निर्धारित उच्च कीमतों के कारण मई 2026 में एचएसडी (हाई स्पीड डीजल) की बिक्री में लगभग 58 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

मई 2026 के महीने के आंकड़े, पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (ओएमसी) के खुदरा आउटलेट्स के माध्यम से डीजल की बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि दर्शाते हैं, जिसमें 327 जिलों में 10 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि 80 जिलों में 30 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई।

नए नियामक उपाय विशेष रूप से खुदरा उपभोक्ताओं को खुदरा बिक्री केन्द्रों पर आपूर्ति में होने वाली अनियमितताओं से होने वाली असुविधा से बचाने के लिए बनाए गए हैं। इन उपायों का नागरिकों पर किसी भी तरह से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि कार या दोपहिया वाहन चलाने वाले औसत व्यक्ति के लिए 200 लीटर की सीमा किसी भी निजी वाहन की आवश्यकता से कहीं अधिक है।

इन उपायों का उद्देश्य उन बड़े उपभोक्ताओं को रोकना है जो खुदरा बिक्री केन्द्रों से डीजल खरीदकर थोक और खुदरा कीमतों के अंतर का अनुचित लाभ उठा रहे है। सरकार के संज्ञान में डीजल की बड़ी मात्रा में जेरी कैन में खरीद और उसकी पुनर्विक्रय के कई मामले आए हैं। इस आदेश से डीजल की कालाबाजारी और जमाखोरी में शामिल ऐसे खरीदारों/संचालकों, डीलरों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकेगी।

खुदरा बिक्री केन्द्रों से थोक उपभोक्ताओं को ईंधन की आपूर्ति किए जाने पर रोक लगाने का मतलब है कि खुदरा ग्राहकों के लिए सिस्टम में ईंधन की अधिक आपूर्ति बनी रहती है।

पश्चिम एशिया में जारी आर्थिक संकट के दौरान खुदरा उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की बिक्री पर प्रतिदिन लगभग 500 करोड़ रुपये का नुकसान वहन कर रही हैं। यह क्रमिक मूल्य समर्थन खुदरा उपभोक्ताओं की सुरक्षा और परिवारों, किसानों और अन्य अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है। यह समर्थन औद्योगिक और थोक आपूर्ति के लिए नहीं है, जहां कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्यों के अनुरूप ही निर्धारित की जाती हैं, जिसके परिणामस्वरूप खुदरा डीजल थोक डीजल से लगभग 40 रुपये प्रति लीटर सस्ता है।

थोक उपभोक्ताओं द्वारा हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) के विचलन से स्थानीय स्तर पर आपूर्ति संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं और वास्तविक खुदरा ग्राहकों और आवश्यक सेवाओं के लिए संभावित व्यवधान उत्पन्न हो सकते हैं।

इस आदेश के अनुसरण में, अब केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों, अर्थात् इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड को निम्नलिखित सुनिश्चित करने के निर्देश जारी किए हैं:

  • खुदरा बिक्री केन्द्रों पर डीजल केवल वाहनों के टैंकों या पीईएसओ द्वारा अनुमोदित कंटेनरों में ही दिया जाएगा, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति ग्राहक/वाहन प्रति दिन 200 लीटर होगी। खुदरा दुकानों से खरीदा गया डीजल दोबारा बेचा नहीं जा सकता।
  • औद्योगिक और प्रत्यक्ष उपभोक्ता या संस्थागत और वाणिज्यिक ग्राहकों को खुदरा दुकानों से ईंधन खरीदने की मनाही है और उन्हें अपनी आवश्यकताएं उपभोक्ता पंपों के माध्यम से ही पूरी करनी होंगी।
  • तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) और खुदरा बिक्री केन्द्र संचालक निर्धारित प्रतिबंधों का अनुपालन सुनिश्चित करने और आदेश के प्रावधानों को दरकिनार करने के किसी भी प्रयास को रोकने के लिए जिम्मेदार होंगे।
  • राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों को निर्देश दिया गया है कि वे कालाबाजारी या अनधिकृत हेराफेरी जैसी किसी भी प्रकार की अनियमितताओं के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करें ताकि आम आदमी के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जा सके।

इस आदेश के उल्लंघन पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 और लागू कानूनों के तहत दंड और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

"मोटर स्पिरिट और हाई-स्पीड डीजल ( खुदरा बिक्री केन्द्र के माध्यम से आपूर्ति का अस्थायी विनियमन) आदेश, 2026" को स्पष्ट रूप से एक अस्थायी उपाय के रूप में परिभाषित किया गया है जिसे विशिष्ट, वर्तमान बाजार चुनौतियों का समाधान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

यह कोटा आधारित आपूर्ति व्यवस्था का उपाय नहीं है, और देश में पेट्रोल या डीजल की कोई कमी नहीं है। गौरतलब है कि भारत विश्व का चौथा सबसे बड़ा तेल परिशोधक (रिफाइनर) और पांचवां सबसे बड़ा परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यातक है। सरकार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए और ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखते हुए निर्बाध ईंधन आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।