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केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 15 जून 2026 को भोजपुर में इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क की आधारशिला रखेंगे तथा पटना में एनएफडीबी क्षेत्रीय केंद्र का उद्घाटन करेंगे|Union Minister Rajiv Ranjan Singh and Bihar Deputy Chief Minister Samrat Choudhary will lay the foundation stone for an Integrated Aqua Park in Bhojpur and inaugurate the NFDB Regional Centre in Patna on June 15, 2026.

 

प्रविष्टि तिथि: 14 JUN 2026 4:52PM by PIB Delhi

केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह और बिहार के मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी 15 जून 2026 को भोजपुर में 31.21 करोड़ रुपये के कुल निवेश वाले इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क की आधारशिला रखेंगे तथा पटना में एनएफडीबी क्षेत्रीय केंद्र का उद्घाटन भी करेंगे।

इन पहलों का उद्देश्य आधुनिक प्रौद्योगिकियों, वैज्ञानिक संसाधन प्रबंधन, रोजगार सृजन एवं मूल्य संवर्धन के माध्यम से बिहार के अंतर्देशीय मत्स्य पालन पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना है। साथ ही, ये पहल मत्स्य क्षेत्र को प्रौद्योगिकी-संचालित, गुणवत्ता-केंद्रित एवं निर्यातोन्मुखी क्षेत्र बनाने की दिशा में सहयोग प्रदान करेंगें।

बिहार में पानी का विशाल संसाधन मौजूद हैं, जिनमें 1.22 लाख हेक्टेयर में फैले तालाब और पोखर, 0.64 लाख हेक्टेयर के जलाशय, 9.5 लाख हेक्टेयर की बाढ़-मैदान वाली झीलें और बेकार पड़े हुए जल-क्षेत्र और 21,354 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी नदियां एवं नहरें शामिल हैं। यहां उत्पादन होने वाली मुख्य मछलियों में कतला, रोहू, मृगल, ग्रास कार्प, कॉमन कार्प, सिल्वर कार्प, पाबदा, तिलापिया, पैंगैसियस, मांगुर, स्कैम्पी और सजावटी मछलियां शामिल हैं। इन समृद्ध प्राकृतिक संसाधनों के कारण बिहार के लिए अंतर्देशीय मत्स्य पालन के क्षेत्र में एक अग्रणी केंद्र बनने की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं।

भारत सरकार ने पिछले 11 वर्षों में बिहार के लिए 902.84 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंज़ूरी प्रदान की है, जिसमें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत 579.72 करोड़ रुपये शामिल हैं। इन निवेशों से मज़बूत अवसंचरना प्राप्त हुआ है, जिसमें ब्रूड बैंक, हैचरी, आरएएस और बायोफ्लॉक इकाई, मत्स्य आहार संयंत्र, कोल्ड-चेन, ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं और जलीय रेफरल प्रयोगशालाएं शामिल हैं।

इसके परिणामस्वरूप बिहार में मछली उत्पादन दोगुने से भी ज्यादा हो चुका है, जिससे बिहार अंतर्देशीय मत्स्य उत्पादन करने वाले राज्यों में 9वें स्थान से बढ़कर 4वें स्थान पर पहुंच चुका है। बिहार अब प्रतिवर्ष लगभग 89,600 मीट्रिक टन मछली की आपूर्ति पड़ोसी राज्यों को करता है और इस क्षेत्र मे एक शुद्ध निर्यातक बन चुका है।

बिहार में एक आर्द्रभूमि मत्स्य पालन समूह को अधिसूचित किया गया है, जिसमें लगभग 9.5 लाख हेक्टेयर बाढ़ के मैदानों की झीलें एवं बेकार पड़े जल-निकाय को शामिल किया गया है। इस क्लस्टर का उद्देश्य समुदाय-आधारित मछली पालन प्रबंधन, समन्वित स्टॉकिंग एवं उत्पादन के बाद साझा अवसरचना को बढ़ावा देना है ताकि बिहार के आर्द्रभूमियों की उत्पादन क्षमता संसाधनों की उत्पादक क्षमता का पूरा लाभ किया जा सके।

पीएमएमएसवाई के अंतर्गत भोजपुर के वनसौर फिश सीड फ़ार्म में इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क को कुल 31.21 करोड़ रुपये की मंज़ूरी प्रदान की गई है। इस एक्वा पार्क में कार्प और कैटफ़िश हैचरी, ब्रूडर इनक्यूबेशन यूनिट, बायोफ़्लॉक प्रणाली, आरएएस इकाई, फ़िश फ़ीड मिल, पानी की गुणवत्ता और बीमारी की जांच करने वाली प्रयोगशालाएं, क्वारंटीन सुविधाएं और 50 बिस्तरों वाला ट्रेनिंग हॉस्टल शामिल होंगे।

इसके मुख्य उद्देश्यों में अच्छी नस्ल के बीज की उपलब्धता, आधुनिक जलीय कृषि का प्रदर्शन और एनएफबीडी के सहयोग से संरचित आवासीय कौशल विकास कार्यक्रमों का संचालन शामिल है। उम्मीद है कि यह परियोजना इस इलाके में मतस्य बीज की उपलब्धता को बढ़ावा देगा, आधुनिक तकनीकों को अपनाने में बढ़ावा  देगा एवं किसानों के आय में वृद्धि करेगा।

पटना में एनएफडीबी का क्षेत्रीय केंद्र बिहार एवं पूर्वी क्षेत्र के लिए एक संस्थागत केंद्र के रूप में काम करेगा। विभिन्न योजनाओं, प्रौद्योगिकियों एवं जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन सहायता के लिए बेहतर समन्वय सुनिश्चित करेगा। यह आरएएस, बायोफ्लॉक, केज कल्चर और प्रिसिजन फार्मिंग जैसी आधुनिक जलीय कृषि प्रणाली को बढ़ावा देगा।  यह मछुआरों एवं उद्यमियों की क्षमता बढ़ाने, कौशल विकास एवं उन्हें निरंतर तकनीकी सहायता देने पर विशेष ध्यान देगा।

बिहार में अंतर्देशीय मत्स्य पालन के क्षेत्र में अपार संभावनाएं मौजूद हैं। भारत सरकार पीएमएमएसवाई, एफआईडीएफ और पीएम-एमकेएसएसवाई के माध्यम से एकीकृत विकास को बढ़ावा दे रही है। इन योजनाओं का मुख्य ध्यान मछली उत्पादन बढ़ाने, मत्स्य बीज अवसंरचना को सुदृढ़ करने, कोल्ड-चेन सुविधाओं का विकास, मूल्य संवर्धन, आधुनिक तकनीकों को अपनाने एवं मत्स्य पालकों के कल्याण पर केंद्रित है।

एकीकृत एक्वा पार्क और एनएफडीबी क्षेत्रीय केंद्र मिलकर उत्पादन से लेकर संस्थागत सहयोग की एक सुदृढ़ श्रृंखला का निर्माण करेंगे। यह अवसंरचना, प्रौद्योगिकी एवं ज्ञान प्रणालियों का समन्वय करते हुए उत्पादकता, आय एवं रोजगार में मापनीय एवं उल्लेखनीय सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।